Sunday, November 21, 2010
धनवाद
अब जब मिला है यह तोहफा,सम्भालुंगी उसे पूरी श्रद्धा से.
हमसफ़र जो आपने दिया है,
जैसा मैंने चाहा था वो बिलकुल वैसा है.
मेरी तनहा ज़िंदगी अब तक की,
आपने खुशियों से भर दी.
लोगों के तानो को अनसुना किया,
तन्हाई में भी, सहेलियों के खुसी का जश्न मनाया.
विशवास था मुझे मेरी दूआओं पर,
जिसे आज आपने पूरा किया.
हमसफ़र मेरा सुबसे जुदा है,
मेरे जीवन का सबसे प्यार तोहफा है.
इतनी खुश हूँ मैं, आपके इस वरदान से,
पागल ना हो जाऊ कहीं, मैं ख़ुशी के मारे.
10.10 pm
20th nov 2010.
Saturday, November 20, 2010
मेरी प्रार्थना में तुम्हारा साथ मांगूं.
मेरी सुन्दरता तुम्हारे लिए.
हर वो तारीफ जो मुझे मिलती है,
अच्छी नहीं लगती, जब तक तुम नहीं अच्छा कहते.
कभी जब मैं पूजा करूँ,
मेरी प्रार्थना में तुम्हारा साथ मांगूं.
चाहे टूटे हर रिश्ता,
तुम्हारा साथ हर जनम मैं चाहूँ.
Friday, November 19, 2010
शोहरत और प्यार का एक साथ आना
मेरी जैसी ख़ुशी हर कोई पाए,
शोहरत और प्यार का एक साथ आना,
अगर सपना है तो मुझे मत जगाना.
यह दिन मेरी ज़िंदगी का,
नहीं भुलाना चाहती कभी,
यह कविता आज मैंने इसीलिए लिखी,
ताकि दिन यह इतिहास बन जाये, ज़िंदगी की मेरी.
अब तक अधूरी थी,
एक अनजाने भविष्य को जी रही थी,
अधूरी खुशियाँ थी सारी,
पर, अब मैं संपूर्ण हूँ, नहीं हूँ अधूरी.
Saturday, October 23, 2010
क्या बैर है शनि देव को मुझसे?
पर उन सब के स्वामी हैं देव शनि।
हर वो काम जिनमें मैं माहिर हूँ,
सारी खूबियाँ जो बन सकती है पहचान मेरी,
नहीं होने देते कामयाब मुझे,
क्या पता? क्या बैर है शनि देव को मुझसे?
हे शनिदेव!
दया करो मेरी किस्मत पे,
जब चाहते नहीं की मैं आगे बढूँ,
क्यूँ दी थी खूबियाँ मुझमें?
ऐसा क्या करूँ की आप खुश रहो?
मुझपर अपनी करुना बरसो।
मैं ज्यादा की आशा नहीं करती,
नाही महान बनना चाहती हूँ।
बस इतनी कृपा करो मुझपे,
मेरे गीत कविताओं को पहचान मिल जाए।
12.20 am,
14 sep, 2010.
मुझे तो हर अच्छा इंसान भाता है,
तो हम भिन्न जाती के क्यूँ हैं?
नाक नक्श हमारे एक जैसे,
तो हम अलग जाती के हुए कैसे?
मुझे तो हर अच्छा इंसान भाता है,
उनकी अच्छी आदतें मेरे दिन को छोटा है,
इनमें से कुछ ऐसे भी हैं,
जिनसे ज़िंदगी भर का मेरा नाता है।
किसी को भाई बनाया तो बहेन किसीको,
बहुत कम मिलतें है अच्छे लोक सबको।
अगर जाती भेद अहम् है,
तो पश्चमी देश इसे क्यूँ नहीं मानतें?
हमारा देश इसे इतना मानता है,
इस खोकली प्रथा के लिए,
माता-पिता अपने संतान की जान भी ले सकतें हैं।
2.30 am, 31 aug 2010
Saturday, September 4, 2010
जंगल के बीचो बीच एक झील है।
विसखापत्नाम में एक जंगल है,
उस जंगल के बीचो बीच एक झील है।
पूरी भरी रहती है पानी से, यह बरसातों में।
वन्य प्राणी इस झील के पानी से है प्यास बुझाते।
बहुतो को पता है, इस जगह के बारे में,
दुनिया को काम होता है सारा अट्टालिकाओं से।
दो दिन जब हफ्ते में मिलती है छुट्टी,
बिताते है दिन, आधुनिक बाजारों में,
रातों को नाच-गा के करतें है मस्ती।
मैंने सुना है लोगों को यह कहते,
नहीं है इस शहर में कोई अच्छी जगह घूमने के लिए,
नहीं देखा उन्होंने जंगले पर्वत और झील,
जो फैली हुई है यहाँ, कई-कई मील।
2.28am, 28th aug 2010.
कुछ तो ज़रूर है मुझमें ख़ास,
अगर मैं घमंडी होती,
तो मेरे किस बात पर घमंड करती?
कुछ तो ज़रूर है मुझमें ख़ास,
जिस पर हो मुझे नाज़।
सबसे पहले नाज है मुझे मेरी आवाज़ पर,
सभी तारीफ करते हैं, मेरा गाना सुनकर।
कर लेती हूँ मैं थोड़ी बहुत चित्रकारी,
और सहेली की शादी में,
लगाती हूँ, उनके हाथों में मेहँदी।
मुझे सिलाई कढ़ाई में भी रूचि है,
पर उसके लिए मेरे पास वक़्त नहीं है।
एक बार तीन दिन की छुट्टी में,
सीले थे घर के परदे मैंने।
अच्छे लोगों की मैं दोस्त हूँ,
बुरे लोगों से मैं दूर रहती हूँ।
इसके अलावा मैं बहुत मस्ती करती हूँ,
खुद चाहे दुखी रहूँ, दूसरों को हसती हूँ।
3.30 am, 3rd sept 2010.