कई महीने हो गए मैंने इस पृष्ट को छुआ तक नहीं, इसे देखा भी नहीं. पर अब मैं वापस आ गयी हूँ. अब से यहाँ फिर से कवितायेँ लिखूंगी.
Thursday, June 16, 2011
Sunday, November 21, 2010
धनवाद
धनवाद उस तोहफे का, जो दिया मुझे आपने,
अब जब मिला है यह तोहफा,सम्भालुंगी उसे पूरी श्रद्धा से.
हमसफ़र जो आपने दिया है,
जैसा मैंने चाहा था वो बिलकुल वैसा है.
मेरी तनहा ज़िंदगी अब तक की,
आपने खुशियों से भर दी.
लोगों के तानो को अनसुना किया,
तन्हाई में भी, सहेलियों के खुसी का जश्न मनाया.
विशवास था मुझे मेरी दूआओं पर,
जिसे आज आपने पूरा किया.
हमसफ़र मेरा सुबसे जुदा है,
मेरे जीवन का सबसे प्यार तोहफा है.
इतनी खुश हूँ मैं, आपके इस वरदान से,
पागल ना हो जाऊ कहीं, मैं ख़ुशी के मारे.
10.10 pm
20th nov 2010.
अब जब मिला है यह तोहफा,सम्भालुंगी उसे पूरी श्रद्धा से.
हमसफ़र जो आपने दिया है,
जैसा मैंने चाहा था वो बिलकुल वैसा है.
मेरी तनहा ज़िंदगी अब तक की,
आपने खुशियों से भर दी.
लोगों के तानो को अनसुना किया,
तन्हाई में भी, सहेलियों के खुसी का जश्न मनाया.
विशवास था मुझे मेरी दूआओं पर,
जिसे आज आपने पूरा किया.
हमसफ़र मेरा सुबसे जुदा है,
मेरे जीवन का सबसे प्यार तोहफा है.
इतनी खुश हूँ मैं, आपके इस वरदान से,
पागल ना हो जाऊ कहीं, मैं ख़ुशी के मारे.
10.10 pm
20th nov 2010.
Saturday, November 20, 2010
मेरी प्रार्थना में तुम्हारा साथ मांगूं.
मेरा जीवन अर्पित तुम्हे,
मेरी सुन्दरता तुम्हारे लिए.
हर वो तारीफ जो मुझे मिलती है,
अच्छी नहीं लगती, जब तक तुम नहीं अच्छा कहते.
कभी जब मैं पूजा करूँ,
मेरी प्रार्थना में तुम्हारा साथ मांगूं.
चाहे टूटे हर रिश्ता,
तुम्हारा साथ हर जनम मैं चाहूँ.
मेरी सुन्दरता तुम्हारे लिए.
हर वो तारीफ जो मुझे मिलती है,
अच्छी नहीं लगती, जब तक तुम नहीं अच्छा कहते.
कभी जब मैं पूजा करूँ,
मेरी प्रार्थना में तुम्हारा साथ मांगूं.
चाहे टूटे हर रिश्ता,
तुम्हारा साथ हर जनम मैं चाहूँ.
3.22 am
20th nov 2010
Friday, November 19, 2010
शोहरत और प्यार का एक साथ आना
कहीं मुझे मेरी नज़र ना लग जाये,
मेरी जैसी ख़ुशी हर कोई पाए,
शोहरत और प्यार का एक साथ आना,
अगर सपना है तो मुझे मत जगाना.
यह दिन मेरी ज़िंदगी का,
नहीं भुलाना चाहती कभी,
यह कविता आज मैंने इसीलिए लिखी,
ताकि दिन यह इतिहास बन जाये, ज़िंदगी की मेरी.
अब तक अधूरी थी,
एक अनजाने भविष्य को जी रही थी,
अधूरी खुशियाँ थी सारी,
पर, अब मैं संपूर्ण हूँ, नहीं हूँ अधूरी.
मेरी जैसी ख़ुशी हर कोई पाए,
शोहरत और प्यार का एक साथ आना,
अगर सपना है तो मुझे मत जगाना.
यह दिन मेरी ज़िंदगी का,
नहीं भुलाना चाहती कभी,
यह कविता आज मैंने इसीलिए लिखी,
ताकि दिन यह इतिहास बन जाये, ज़िंदगी की मेरी.
अब तक अधूरी थी,
एक अनजाने भविष्य को जी रही थी,
अधूरी खुशियाँ थी सारी,
पर, अब मैं संपूर्ण हूँ, नहीं हूँ अधूरी.
3.15 am
19th nov 2010.
Saturday, October 23, 2010
क्या बैर है शनि देव को मुझसे?
गृह सारे मदद करना चाहते हैं मेरी,
पर उन सब के स्वामी हैं देव शनि।
हर वो काम जिनमें मैं माहिर हूँ,
सारी खूबियाँ जो बन सकती है पहचान मेरी,
नहीं होने देते कामयाब मुझे,
क्या पता? क्या बैर है शनि देव को मुझसे?
हे शनिदेव!
दया करो मेरी किस्मत पे,
जब चाहते नहीं की मैं आगे बढूँ,
क्यूँ दी थी खूबियाँ मुझमें?
ऐसा क्या करूँ की आप खुश रहो?
मुझपर अपनी करुना बरसो।
मैं ज्यादा की आशा नहीं करती,
नाही महान बनना चाहती हूँ।
बस इतनी कृपा करो मुझपे,
मेरे गीत कविताओं को पहचान मिल जाए।
12.20 am,
14 sep, 2010.
पर उन सब के स्वामी हैं देव शनि।
हर वो काम जिनमें मैं माहिर हूँ,
सारी खूबियाँ जो बन सकती है पहचान मेरी,
नहीं होने देते कामयाब मुझे,
क्या पता? क्या बैर है शनि देव को मुझसे?
हे शनिदेव!
दया करो मेरी किस्मत पे,
जब चाहते नहीं की मैं आगे बढूँ,
क्यूँ दी थी खूबियाँ मुझमें?
ऐसा क्या करूँ की आप खुश रहो?
मुझपर अपनी करुना बरसो।
मैं ज्यादा की आशा नहीं करती,
नाही महान बनना चाहती हूँ।
बस इतनी कृपा करो मुझपे,
मेरे गीत कविताओं को पहचान मिल जाए।
12.20 am,
14 sep, 2010.
मुझे तो हर अच्छा इंसान भाता है,
जब रंग हमारे खून का एक है,
तो हम भिन्न जाती के क्यूँ हैं?
नाक नक्श हमारे एक जैसे,
तो हम अलग जाती के हुए कैसे?
मुझे तो हर अच्छा इंसान भाता है,
उनकी अच्छी आदतें मेरे दिन को छोटा है,
इनमें से कुछ ऐसे भी हैं,
जिनसे ज़िंदगी भर का मेरा नाता है।
किसी को भाई बनाया तो बहेन किसीको,
बहुत कम मिलतें है अच्छे लोक सबको।
अगर जाती भेद अहम् है,
तो पश्चमी देश इसे क्यूँ नहीं मानतें?
हमारा देश इसे इतना मानता है,
इस खोकली प्रथा के लिए,
माता-पिता अपने संतान की जान भी ले सकतें हैं।
2.30 am, 31 aug 2010
तो हम भिन्न जाती के क्यूँ हैं?
नाक नक्श हमारे एक जैसे,
तो हम अलग जाती के हुए कैसे?
मुझे तो हर अच्छा इंसान भाता है,
उनकी अच्छी आदतें मेरे दिन को छोटा है,
इनमें से कुछ ऐसे भी हैं,
जिनसे ज़िंदगी भर का मेरा नाता है।
किसी को भाई बनाया तो बहेन किसीको,
बहुत कम मिलतें है अच्छे लोक सबको।
अगर जाती भेद अहम् है,
तो पश्चमी देश इसे क्यूँ नहीं मानतें?
हमारा देश इसे इतना मानता है,
इस खोकली प्रथा के लिए,
माता-पिता अपने संतान की जान भी ले सकतें हैं।
2.30 am, 31 aug 2010
Saturday, September 4, 2010
जंगल के बीचो बीच एक झील है।
विसखापत्नाम में एक जंगल है,
उस जंगल के बीचो बीच एक झील है।
पूरी भरी रहती है पानी से, यह बरसातों में।
वन्य प्राणी इस झील के पानी से है प्यास बुझाते।
बहुतो को पता है, इस जगह के बारे में,
दुनिया को काम होता है सारा अट्टालिकाओं से।
दो दिन जब हफ्ते में मिलती है छुट्टी,
बिताते है दिन, आधुनिक बाजारों में,
रातों को नाच-गा के करतें है मस्ती।
मैंने सुना है लोगों को यह कहते,
नहीं है इस शहर में कोई अच्छी जगह घूमने के लिए,
नहीं देखा उन्होंने जंगले पर्वत और झील,
जो फैली हुई है यहाँ, कई-कई मील।
2.28am, 28th aug 2010.
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