Saturday, August 20, 2011

काश, थोडा और पढ पाती

विज्ञान, मेरा प्यारा विषय,
नही दे पाई मै  इसको ज्यादा समय.
कई सालों कि मेहनेत करनी होती है,
कई सालों तक पढ़ते रहन पड़ता है.
जार सा  धयान इधर उधर भटका,
तो पाठ समझ में, बडी मुश्किल से आता.

बचपन में डरती थी, भौतिक और रसायन विज्ञान से,
सिर्फ जीव विज्ञान समझ में आता था मुझे.
जब बारह्वी कक्षा में आई ,
जीव विज्ञान के साथ-साथ् रसायन  विज्ञान भी भाने  लगी.

आगे की पांच सालों की पढाई में,
सारे विज्ञान के हि विषय थे मेरे.
मेरी सबसे उची सिक्षा,
खतम हुइ पर्यावरण के विषय में.
आज भी ऐसा लगता है,
काश, थोडा  और पढ पाती विज्ञान के बारे में.

4.39 am,
20th aug 2011

Sunday, August 14, 2011

अब बस कुछ ही दूर है पश्चिम बंगाल.

इस राह से गुज़रते हुए,
न जाने कितने हि गांव देखे.
शहरों  कि संख्या कुछ कम हि थी.
पर जो भी दिखी, कुछ तो महानगर थी

पार कर चुकी दो प्रान्त,
अब बस कुछ ही दूर है पश्चिम बंगाल.
मेरा जनम हुआ था यहाँ,
इस राज्य में.
जब भी जिक्र होता है इस राज्य का,
भर आतें हैं आंसू मेरी आखों में.

इस बार आई हूँ यहाँ दो साल बाद,
मिलुंगी अपने प्रियाजनो से, कितने ही महीनो बाद.
कितनी सारी उमंगें हैं दिल में मेरे,
काटे नही कट ता, समय इस सफर में.
10.50 am,
12th feb 2010.

Sunday, August 7, 2011

नाम है उसका स्वाति .

बहुत अच्छी दोस्त है मेरी,
नाम है उसका स्वाति .
हम कुछ सालो पहले मिले थे.
बन गए दोस्त जीवन भर के लिए.

विश्व विद्यालय में मेरी सहपाठी थी,
दो- तीन दिन के बतों से ही पाता चला,
कितनी  समानता है हमारी.
पढे थे हम दोनो  ही केन्द्रीय विद्यालय से,
पर भारत देश के अलग अलग प्रान्त में.

बाते कर्ने के लिए कै थे,
पर मन् को चैन मिलता था स्वाति के हि बातो से.
उस से मुझे बहुत प्रेरणा मिली है,
अन्याय को न सहने कि सीख, सीखा है मैने उसी से ही.
अपने सप्नो को प्यार करना, सिखाया है मुझे स्वाती  ने ही.
5.00 am,
7th Aug 2011.

Thursday, June 16, 2011

मेरी वापसी..

कई महीने हो गए मैंने इस पृष्ट को छुआ तक नहीं, इसे देखा भी नहीं. पर अब मैं वापस आ गयी हूँ. अब से यहाँ फिर से कवितायेँ लिखूंगी. 

Sunday, November 21, 2010

धनवाद

धनवाद उस तोहफे का, जो दिया मुझे आपने,
अब जब मिला है यह तोहफा,सम्भालुंगी उसे पूरी श्रद्धा से.
हमसफ़र जो आपने दिया है,
जैसा मैंने चाहा था वो बिलकुल वैसा है.
मेरी तनहा ज़िंदगी अब तक की,
आपने खुशियों से भर दी.
लोगों के तानो को अनसुना किया,
तन्हाई में भी, सहेलियों के खुसी का जश्न मनाया.
विशवास था मुझे मेरी दूआओं पर,
जिसे आज आपने पूरा किया.
हमसफ़र मेरा सुबसे जुदा है,
मेरे जीवन का सबसे प्यार तोहफा है.
इतनी खुश हूँ मैं, आपके इस वरदान से,
पागल ना हो जाऊ कहीं, मैं ख़ुशी के मारे.
10.10 pm
20th nov 2010.

Saturday, November 20, 2010

मेरी प्रार्थना में तुम्हारा साथ मांगूं.

मेरा जीवन अर्पित तुम्हे,
मेरी सुन्दरता तुम्हारे लिए.
हर वो तारीफ जो मुझे मिलती है,
अच्छी नहीं लगती, जब तक तुम  नहीं अच्छा कहते.


कभी जब मैं पूजा करूँ,
मेरी प्रार्थना में तुम्हारा साथ मांगूं.
चाहे टूटे हर रिश्ता,
तुम्हारा साथ हर जनम मैं चाहूँ.
3.22 am
20th nov 2010

Friday, November 19, 2010

शोहरत और प्यार का एक साथ आना

कहीं मुझे मेरी नज़र ना लग जाये,
मेरी जैसी ख़ुशी हर कोई पाए,
शोहरत और प्यार का एक साथ आना,
अगर सपना है तो मुझे मत जगाना.


यह दिन मेरी ज़िंदगी का,
नहीं भुलाना चाहती कभी,
यह कविता आज मैंने इसीलिए लिखी,
ताकि दिन यह इतिहास बन जाये, ज़िंदगी की मेरी.


अब तक अधूरी थी,
एक अनजाने भविष्य को जी रही थी,
अधूरी खुशियाँ थी सारी,
पर, अब मैं संपूर्ण हूँ, नहीं हूँ अधूरी.
3.15 am
19th nov 2010.